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Ganga Stuti – Jai Jai Bhagirath Nandini Lyrics in Hindi, English PDF

Written by Dr. Hemlata, Editorially reviewed by the Chalisa-PDF.com editorial team Last reviewed: August 22, 2026
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गंगा स्तुति: जय जय भगीरथ नन्दिनि (Ganga Stuti) नामक इस स्तुति में गंगा माँ की महिमा और उनके द्वारा हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन किया गया है। गंगा माँ को भगीरथ की पुत्री माना जाता है, जिन्होंने अपने कठोर तप से गंगा को धरती पर अवतरित किया। गंगा का पवित्र जल सदियों से न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में, बल्कि हमारे जीवन के अनेक पहलुओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। श्री गायत्री चालीसा के नियमित पाठ से साधक का मन शांत होता है|

गंगा स्तुति एक अद्वितीय और शक्तिशाली भक्ति गीत है जो गंगा माँ की महिमा का गान करता है और उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति को अभिव्यक्त करता है। इस स्तुति का पाठ करने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि आत्मा को भी एक विशेष प्रकार की संतुष्टि और ऊर्जा का अनुभव होता है।

गंगा माँ के प्रति श्रद्धा और प्रेम को और भी प्रबल बनाने के लिए इस गंगा स्तुति को जरूर पढ़ें और गाएं। जय गंगे!

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  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| गंगा स्तुति: जय जय भगीरथ नन्दिनि ||

जय जय भगीरथ नन्दिनि, मुनि-चय चकोर-चन्दनि,
नर-नाग-बिबुध-बन्दिनि जय जहनु बालिका ।
बिस्नु-पद-सरोजजासि, ईस-सीसपर बिभासि,
त्रिपथ गासि, पुन्रूरासि, पाप-छालिका ॥

बिमल बिपुल बहसि बारि, सीतल त्रयताप-हारि,
भँवर बर, बिभंगतर तरंग-मालिका ।
पुरजन पूजोपहार, सोभित ससि धवलधार,
भंजन भव-भार, भक्ति-कल्पथालिका ॥

थ्नज तटबासी बिहंग, जल-थल-चर पसु-पतंग,
कीट,जटिल तापस सब सरिस पालिका ।
तुलसी तव तीर तीर सुमिरत रघुवंस-बीर,
बिचरत मति देहि मोह-महिष-कालिका ॥

|| Ganga Stuti – Jai Jai Bhagirath Nandini ||

Jay Jay Bhagirath Nandini, Muni-Chay Chakor-Chandani,
Nar-Nag-Bibudh-Bandini Jay Jahanu Balika.
Visnu-Pad-Saroja-Jaasi, Ees-Sispar Bibhasi,
Tripath Gaasi, Punroorasi, Paap-Chaalika.

Bimal Bipul Bahasi Baari, Seetal Traya-Taap-Haari,
Bhanvar Bar, Bibhangtar Tarang-Maalika.
Purjan Pujopahaar, Sobhit Sasi Dhavaladhaari,
Bhanjan Bhav-Bhaar, Bhakti-Kalpathaalika.

Thanaj Tatabaasi Bihang, Jal-Thal-Char Pasu-Patang,
Keet Jatil Tapas Sab Saris Palika.
Tulsi Tav Teer Teer Sumirat RaghuVansh-Veer,
Bicharat Mati Dehi Moh-Mahish-Kaalika.

Ganga Stuti Jai Jai Bhagirath Nandini Hindi lyrics with Goddess Ganga
गंगा स्तुति – जय जय भगीरथ नन्दिनि

हे भगीरथ-नंदिनी गंगे, तुम्हारी जय हो, जय हो! तुम मुनिरूपी चकोरों के लिए शीतल चंद्रिका स्वरूप हो। मनुष्य, नाग और देवतागण सभी तुम्हारी वंदना करते हैं। हे जाह्नवी, तुम्हारी जय हो!

तुम भगवान विष्णु के चरण-कमलों से प्रकट हुई और शिवजी के जटाजूट पर विराजित हुई हो। स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल—इन त्रिलोकी में तुम तीन धाराओं के रूप में अविरल बहती हो। तुम पुण्यराशि हो और समस्त पापों का प्रक्षालन करने वाली हो।

तुम्हारी धारा अगाध, निर्मल और शीतल है, जो तीनों तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) का शमन करती है। तुम सुंदर भंवरों और चंचल तरंगों की माला से सुशोभित हो। नगरवासियों द्वारा अर्पित पूजा-उपहारों से, चंद्रमा के समान तुम्हारी धवल धारा और भी दिव्य प्रकाशित हो रही है। यह धारा संसार के जन्म-मरण रूपी भार को हरने वाली तथा भक्तिरूपी कल्पवृक्ष की रक्षा करने वाली पावन थाली है।

तुम अपने तट पर निवास करने वाले पक्षी, जलचर, पशु, पतंग, कीट और जटाधारी तपस्वियों का समभाव से पालन करती हो। हे मोहरूपी महिषासुर का विनाश करने वाली कालिका-स्वरूपिणी गंगे! इस तुलसीदास को ऐसी बुद्धि प्रदान करो कि मैं श्री रघुनाथजी का स्मरण करता हुआ, सदैव आपके पावन तट पर ही विचरण करूं।

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गंगा स्तुति के लाभ

गंगा स्तुति (Ganga Stuti) एक धार्मिक और आध्यात्मिक गीत है जो हिन्दू धर्म में गंगा नदी की पूजा और स्तुति को व्यक्त करता है। यह स्तुति गंगा नदी की पवित्रता, महत्व, और उसकी दिव्यता की सराहना करती है। गंगा नदी को हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और इसे देवी माना जाता है।

गंगा स्तुति के मुख्य लाभ और महत्व को समझने के लिए, निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की जा सकती है:

गंगा का आध्यात्मिक महत्व

गंगा नदी को हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसे देवी गंगा का रूप माना जाता है और इसे धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और तीर्थयात्रा में अत्यधिक महत्व दिया जाता है। गंगा स्तुति में गंगा माता की पूजा और उनके दिव्य गुणों का वर्णन किया गया है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति और परम सुख प्राप्त करने में सहायता करती है।

गंगा की पवित्रता और शुद्धता

गंगा नदी को शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। गंगा स्तुति में गंगा नदी की शुद्धता की सराहना की जाती है और इसे जीवनदायिनी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह भक्तों को आत्मिक शुद्धता प्राप्त करने और उनके जीवन को पवित्र बनाने के लिए प्रेरित करती है।

भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन

गंगा स्तुति को नियमित रूप से गाने और सुनने से भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। यह स्तुति मानसिक शांति, आत्म-संतोष, और भावनात्मक संतुलन प्रदान करने में सहायक होती है। गंगा स्तुति के माध्यम से भक्त अपने दुखों और समस्याओं से उबर सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

गंगा स्तुति सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह भारतीय संस्कृति और धार्मिकता की पहचान को मजबूत करती है और समाज में एकता और अखंडता को बढ़ावा देती है। गंगा स्तुति के माध्यम से लोग अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेज सकते हैं और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकते हैं।

स्वास्थ्य लाभ

गंगा नदी के पानी को शुद्ध और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। स्तुति सुनने और गाने से मानसिक तनाव कम हो सकता है, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर हो सकता है। भक्तों को गंगा नदी में स्नान करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त होती है, जो उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता

गंगा स्तुति धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देती है। यह भक्तों को गंगा नदी के महत्व और उसकी दिव्यता के बारे में जानने में मदद करती है। इसके माध्यम से लोग धार्मिकता और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर हो सकते हैं और अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

सुख और समृद्धि की प्राप्ति

गंगा स्तुति करने से भक्तों को सुख और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। यह स्तुति देवी गंगा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक तरीका है, जो जीवन में सुख, समृद्धि, और सफलता लाने में सहायक हो सकती है। भक्त इस स्तुति के माध्यम से गंगा माता की कृपा को अपने जीवन में महसूस कर सकते हैं और अपने जीवन की समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग

गंगा स्तुति धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, और व्रतों में गाया जाता है, जो धार्मिक अनुष्ठानों की सफलता और प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं। स्तुति को पूजा में शामिल करने से अनुष्ठान की दिव्यता और प्रभावशीलता बढ़ जाती है।

परंपरा और संस्कारों का संरक्षण

गंगा स्तुति भारतीय परंपरा और संस्कारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे गाकर और सुनकर लोग अपनी परंपराओं और संस्कारों को जीवित रखते हैं और उन्हें आगामी पीढ़ियों तक पहुंचाते हैं। स्तुति के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और संवर्धन होता है।

प्रेरणा और मानसिक शक्ति

गंगा स्तुति सुनने और गाने से मानसिक प्रेरणा और शक्ति प्राप्त होती है। यह भक्तों को आत्म-विश्वास, धैर्य, और सकारात्मकता के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है। स्तुति के माध्यम से लोग आत्म-समर्पण और दृढ़ता की भावना को जागृत कर सकते हैं।

स्तुति की धार्मिक और आध्यात्मिक लाभों की समझ से भक्त अपने जीवन को अधिक समृद्ध, पवित्र, और संतुलित बना सकते हैं। इस स्तुति के माध्यम से वे गंगा माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को सही दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।


कौन सी गंगा आरती सबसे प्रसिद्ध है?

भारत में सबसे प्रसिद्ध गंगा आरती वाराणसी (बनारस) में दशाश्वमेध घाट पर होने वाली शाम की आरती है। यह आरती एक अत्यंत भव्य, नियमित और दर्शनीय अनुष्ठान है जिसमें पंडितों द्वारा विशेष मंत्रोच्चार, घंटियों, शंखों, धूप-दीप और अग्नि के साथ माँ गंगा की पूजा की जाती है। हरिद्वार की हर की पौड़ी घाट पर होने वाली आरती भी अत्यंत प्रसिद्ध और भव्य है। इन दोनों का अपना-अपना विशिष्ट आकर्षण और महत्व है।

वाराणसी में कौन सी घाट की आरती प्रसिद्ध है?

वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर होने वाली शाम की गंगा आरती सबसे प्रसिद्ध और भव्य मानी जाती है। यह प्रतिदिन सूर्यास्त के समय आयोजित होती है और इसमें विधि-विधान से की जाने वाली पूजा, समूह में किए जाने वाले मंत्रोच्चार, अग्नि के पंजे (आरती थाल) और घंटियों की ध्वनि एक मनमोहक और आध्यात्मिक वातावरण बनाती है, जो हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

क्या कोई लड़की गंगा आरती कर सकती है?

हाँ, कोई भी लड़की या महिला गंगा आरती में भाग ले सकती है और आरती कर सकती है। गंगा आरती सभी भक्तों के लिए खुली है और इसमें कोई लैंगिक प्रतिबंध नहीं है। आमतौर पर मुख्य रूप से पुरुष पुजारी ही संस्थागत रूप से आयोजित बड़ी आरती का संचालन करते देखे जाते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर या छोटे समूहों में घाट पर कोई भी महिला या लड़की गंगा माँ की आरती कर सकती है। भक्ति और श्रद्धा सर्वोपरि हैं।

गंगा की 7 धाराएं कौन सी हैं?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, गंगा नदी की सात पवित्र धाराओं (सप्त-धाराओं) के नाम इस प्रकार हैं: ह्लादिनी, पावनी, नलिनी, सीता, सुचक्षु, सिन्धु और अम्बुघा। एक अन्य प्रचलित सूची के अनुसार इन्हें नालिनी, ह्लादिनी, पावनी, कपिला, सीता, सिन्धु और अम्बुजा के नाम से भी जाना जाता है। ये धाराएं आकाशीय गंगा (स्वर्ग की मंदाकिनी) की प्रतिनिधि मानी जाती हैं और इनका उल्लेख गंगा के विश्वव्यापी और शुद्धिकरण करने वाले स्वरूप को दर्शाने के लिए किया गया है।

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Published: August 26, 2026 — Last updated: August 26, 2026

Written by Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert

Hemlata is a practicing Hindu devotee with over 15 years of experience in daily recitation of Chalisas, Aartis, Mantras, and Stotras. She has studied devotional texts extensively and is committed to preserving authentic versions of traditional hymns. The Text on this page has been carefully verified with commonly accepted temple and devotional editions to ensure accuracy, readability, and adherence to traditional practice.

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